
चुनावी साल में क्या जेडीयू (JDU) केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union cabinet) में शामिल होगी? इस सवाल का जवाब बिहार की तमाम सियासी पार्टियां जानना चाहती हैं. हालांकि इस चर्चा के साथ ये सवाल भी है कि पीएम मोदी (PM Narendra Modi) मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए जेडीयू के सामने कौन सी अड़चनें हैं.
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर प्रदेश की तमाम सियासी पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं. लेकिन इसी बीच सियासी गलियारों में एक चर्चा तेजी से उठी कि क्या जेडीयू (JDU), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के मंत्रिमंडल (Union cabinet) में शामिल हो सकती है? इस चर्चा के गर्म होने के बाद बिहार (Bihar) की सियासत में हलचल तेज हो गई है. जेडीयू से सवाल पूछे जाने लगे, लेकिन किसी नेता ने प्रतिक्रिया नहीं दी.
आखिरकार जदयू संसदीय दल के अध्यक्ष ललन सिंह सामने आए और कहा कि ये प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन तय नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही करेंगे. ललन सिंह ने ये भी साफ किया कि इस वक़्त मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है. जदयू नेता ललन सिंह ने तस्वीर साफ करने की भले कोशिश की हो, लेकिन जेडीयू के लिए मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होना इतना आसान नहीं होने जा रहा है. कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिससे पार पाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा.
जेडीयू के सामने ये समस्याएं
1- नीतीश कुमार के लिए चुनावी साल में जातीय समीकरण साधने की चुनौती. मंत्रिमंडल में किस जाति को जगह दें या नहीं दें, यह तय करना आसान नहीं होगा.
2-जेडीयू ने लोकसभा चुनाव में अति पिछड़ा-कुशवाहा और दलित कार्ड खेला था, मंत्रिमंडल विस्तार में भी इन तबकों का ख्याल रखना होगा.
3- नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाने वाले आरसीपी सिंह और ललन सिंह के साथ-साथ संतोष कुशवाहा के नाम की चर्चा है, लेकिन इनके शामिल होने से नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग पर असर पड़ सकता है.
4- बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा अभी तक तय नहीं हुआ है. जब तक इसकी तस्वीर साफ नहीं होती, जेडीयू के लिए मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होना मुश्किल हो सकता है.
5- NRC सहित कुछ ऐसे फैसले, जो केंद्र सरकार ले सकती है, मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद उस पर विरोध करना जेडीयू के लिए मुश्किल हो सकता है.
6- विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों को मैसेज देने के लिए मोदी मंत्रिमंडल में किसी मुस्लिम नेता को शामिल करना होगा.
ढूंढने होंगे कई जवाब
चूंकि सीएम नीतीश कुमार NRC का विरोध कर चुके हैं. ऐसे में ऊपर लिखे तथ्य महत्वपूर्ण हैं, जिनका जवाब सीएम नीतीश कुमार को ढूंढना होगा. बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय ने कहा कि नीतीश कुमार के लिए जातीय समीकरण साधना आसान नहीं होगा. चुनावी साल में किसे खुश करें या किसे नाराज, इसका ध्यान रखना होगा. वहीं जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक भी सोशल इंजीनियरिंग के बहाने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के विकास की बात कह बड़ा इशारा कर रहे हैं. बहरहाल, इन खबरों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह साफ कर चुके हैं कि बिहार विधानसभा का चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.
इसलिए बिहार भाजपा के नेता जेडीयू के मोदी कैबिनेट में शामिल होने की खबरों से खुश हैं. बीजेपी प्रवक्ता अजित चौधरी ने कहा भी कि इससे एनडीए मजबूत होगा. लेकिन बिहार की सियासत के चाणक्य माने जाने वाले नीतीश कुमार की कोशिश होगी कि इन सवालों का जवाब ढूंढने के बाद ही पार्टी मोदी-कैबिनेट में शामिल हो.
आखिरकार जदयू संसदीय दल के अध्यक्ष ललन सिंह सामने आए और कहा कि ये प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन तय नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही करेंगे. ललन सिंह ने ये भी साफ किया कि इस वक़्त मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है. जदयू नेता ललन सिंह ने तस्वीर साफ करने की भले कोशिश की हो, लेकिन जेडीयू के लिए मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होना इतना आसान नहीं होने जा रहा है. कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिससे पार पाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा.
जेडीयू के सामने ये समस्याएं
1- नीतीश कुमार के लिए चुनावी साल में जातीय समीकरण साधने की चुनौती. मंत्रिमंडल में किस जाति को जगह दें या नहीं दें, यह तय करना आसान नहीं होगा.
2-जेडीयू ने लोकसभा चुनाव में अति पिछड़ा-कुशवाहा और दलित कार्ड खेला था, मंत्रिमंडल विस्तार में भी इन तबकों का ख्याल रखना होगा.
3- नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाने वाले आरसीपी सिंह और ललन सिंह के साथ-साथ संतोष कुशवाहा के नाम की चर्चा है, लेकिन इनके शामिल होने से नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग पर असर पड़ सकता है.
4- बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा अभी तक तय नहीं हुआ है. जब तक इसकी तस्वीर साफ नहीं होती, जेडीयू के लिए मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होना मुश्किल हो सकता है.
5- NRC सहित कुछ ऐसे फैसले, जो केंद्र सरकार ले सकती है, मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद उस पर विरोध करना जेडीयू के लिए मुश्किल हो सकता है.
6- विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों को मैसेज देने के लिए मोदी मंत्रिमंडल में किसी मुस्लिम नेता को शामिल करना होगा.
ढूंढने होंगे कई जवाब
चूंकि सीएम नीतीश कुमार NRC का विरोध कर चुके हैं. ऐसे में ऊपर लिखे तथ्य महत्वपूर्ण हैं, जिनका जवाब सीएम नीतीश कुमार को ढूंढना होगा. बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय ने कहा कि नीतीश कुमार के लिए जातीय समीकरण साधना आसान नहीं होगा. चुनावी साल में किसे खुश करें या किसे नाराज, इसका ध्यान रखना होगा. वहीं जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक भी सोशल इंजीनियरिंग के बहाने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के विकास की बात कह बड़ा इशारा कर रहे हैं. बहरहाल, इन खबरों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह साफ कर चुके हैं कि बिहार विधानसभा का चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.
इसलिए बिहार भाजपा के नेता जेडीयू के मोदी कैबिनेट में शामिल होने की खबरों से खुश हैं. बीजेपी प्रवक्ता अजित चौधरी ने कहा भी कि इससे एनडीए मजबूत होगा. लेकिन बिहार की सियासत के चाणक्य माने जाने वाले नीतीश कुमार की कोशिश होगी कि इन सवालों का जवाब ढूंढने के बाद ही पार्टी मोदी-कैबिनेट में शामिल हो.
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